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छोड़ दो मुझे

Stop Making India  The country of Satan's mind Please stop Making India The Country of rapists ..... छोड़ दो मुझे इन भेड़ियों के शहर में समय के इस पहर में न भेजो मुझे छोड़ दो मुझे । अब इस देश मे इंसान के वेष में कितने जानवर घूम रहे है न जाने कब क्या हो जाये शक्ति और पैसों के बल पे कितने शैतान झूम रहे है इन भेड़ियों के शहर में समय के इस पहर में न भेजो मुझे छोड़ दो मुझे । इससे अच्छा तो रावण राज था उसको भी मानवता का लाज था राम की धरती पे , कृष्ण की भूमि पे, अंधकार घना छाया है रोशनी की एक किरण भी नही न ही रोशनी की आस है इस नरक में इन भेड़ियों के शहर में समय के इस पहर में न भेजो मुझे छोड़ दो मुझे ।

आरक्षण

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 आरक्षण पल - पल हर पल  क्षण - क्षण हर क्षण  विष बनता जा रहा है  ये आरक्षण।  तुम क्या जानो  तुम क्या मानो शहर की मूरत हो तुम  हमारे लिए तो बस एक ही  विकास का पहलू बनता जा रहा है  ये आरक्षण।  तुम करते हो दंगे  तुमने देश के विकास  को रोका  सारे देश के बुद्धिजीवियों को  आरक्षण के नाम पर तुमने टोका  वो तो चले गए विदेश  रह गया पिछड़ा अपना देश  देश को बाँटता जा रहा है  ये आरक्षण।    क्यों सपने में तुम जी रहे हो  अमृत प्याला पी रहे हो  तुम्हारे पास है सारी सुविधा  फिर क्यों है तुम्हे दुविधा  कभी अपने घर से बाहर निकलो हमारे लिए देश वही है ये तुम सोच लो  शहर नहीं गांव देखो  हमारी असली पावं देखो  अभी भी जकड़े है हम छुआ छूट के इस बीमारी से  पता नहीं कब होंगे दूर अपनी इस लाचारी से  और तुम कह रहे हो  ये तुम सोच रहे हो  की दंगे हम है करते  साहब,  हमें तो अपनी किस्मत से फुरसत नहीं  ...

यही तो जिंदगी हैं

यही तो जिंदगी हैं आगे बढ़ना और कभी न रुकना पीछे हो कोई भी चाहे अपना ये सफर एक पयाम है क्योकि  यही तो जिंदगी हैं।  दूर रहो सभी मोह माया से  जीवन अमृत बनाओ अपनी काया से  कोई भी लकीरो से आगे बढ़ता नहीं  सिर्फ बोलने से कामयाब होता नहीं  अपने विस्वास से पर्वत गिराओ  अपने मेहनत से लकीरें बनाओ  ये सफर एक पयाम हैं क्योकि  यही तो जिंदगी हैं।  अपने आप को खुद से मिलाना सीखो  दुनिया से अकेले लड़ना सीखो  जब तुम आगे बढ़ोगे  जब तुम कामयाब होंगे  यही लोग तुम्हारे कदम चूमेंगे  यही लोग तुम्हारे अपने होंगे  डर से डर को मिटाना सीखो  अपने विश्वास के धार से  किस्मत की लकीरो को मिटाना सीखो  ये सफर एक पयाम है क्योकि  यही तो जिंदगी है।    

पर मैं रुका नही

पर मैं रुका नही तुमने मुझे रोका, उसने मुझे रोका, पर मैं रुका नही, इस दुनिया के सामने झुका नही, अकेले ही चला था मैं, अपनी किस्मत के आगे खड़ा था मैं, कई ठोकरों से सामना हुआ पर मैं रुका नही, इस दुनिया के आगे झुका नही जिंदगी के उस मुकाम पर आ गया हूं जहा से लौटना आसान नही कदम तो आगे बढा दिया हु जहा से पीछे खींचना आसान नही यू ही भागते भागते खुद को पीछे छोड़ आया हु जहा से अपने आप को पाना आसान नही दो नावो की सवारी कर रहा हु जहा डूबने से बचना मुमकिन नही एक तरफ मेरे सपने है, दूसरी तरफ मेरी दुनिया अपने सपनो को हर कदम पर पूरा करते मैं कभी रुका नही इस दुनिया के सामने झुका नही 

दो ध्रुवीयता का अंत

दो ध्रुवीयता का अंत  सोवियत प्रणाली क्या थी ?  - समाजवादी सोवियत गणराज्य (ussr ) रूस में हुई 1917 की समाजवादी क्रांति के बाद अस्तित्व में आया। - यह क्रांति पूंजीवादी व्यवस्था के विरोध में हुई थी। - निजी सम्पति की संस्था को समाप्त करने और समाज को समानता के सिद्धांत सचेत रूप से रचने की सबसे बड़ी कोशिश थी।  - पार्टी की संस्था को महत्व। - विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं। - अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध तथा राज्य के नियंत्रण में। - संचार की उच्च प्रणाली - विशाल ऊर्जा संसाधन सोवियत प्रणाली की कमियाँ - - सोवियत प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा।  - प्रणाली का सतावादी होना। - लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी न होना। - एक दाल यानि कम्यूनिस्ट पार्टी का शासन। दल का जनता के प्रति जवाबदेह न होना। संघ के 15 गणराज्यो में रूस का प्रभूत्व। हथियारों की होड में भारी कीमत चुकाना बुनियादी ढांचों का वेस्टर्न कन्ट्रीज से पीछे होना। लोगो की बुनियादी आकांक्षाओं को पूरा न करना।   सोवियत संघ के विघटन की परिणतियाँ  - समाजवादी विचारधारा तथा पूँजीवादी विचारधारा के बिच प्रति...

Fancy BY JOHN KEATS

Fancy BY  JOHN KEATS Ever let the Fancy roam,  Pleasure never is at home:  At a touch sweet Pleasure melteth,  Like to bubbles when rain pelteth;  Then let winged Fancy wander  Through the thought still spread beyond her:  Open wide the mind's cage-door,  She'll dart forth, and cloudward soar.  O sweet Fancy! let her loose;  Summer's joys are spoilt by use,  And the enjoying of the Spring  Fades as does its blossoming;  Autumn's red-lipp'd fruitage too,  Blushing through the mist and dew,  Cloys with tasting: What do then?  Sit thee by the ingle, when  The sear faggot blazes bright,  Spirit of a winter's night;  When the soundless earth is muffled,  And the caked snow is shuffled  From the ploughboy's heavy shoon;  When the Night doth meet the Noon  In a dark conspiracy  To banish Even from her sky.  Sit ...